PPF अकाउंट के 15 साल पूरे होने पर आपके पास तीन विकल्प होते हैं — पूरी रकम निकालकर अकाउंट बंद करें, नए कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ इसे 5 साल के लिए एक्सटेंड करें, या बिना कोई नया पैसा जमा किए इसे यूं ही जारी रखें। कौन सा विकल्प चुनें, यह आपकी मौजूदा टैक्स स्थिति और पैसों की ज़रूरत पर निर्भर करता है।
एक नज़र में
- विकल्प 1 — पूरी निकासी: अकाउंट बंद करें, पूरा पैसा टैक्स-फ्री मिलेगा
- विकल्प 2 — कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ एक्सटेंशन: मैच्योरिटी के 1 साल के भीतर Form H जमा करें, फिर 5 और साल तक पहले जैसे निवेश और 80C छूट जारी रहेगी
- विकल्प 3 — बिना कॉन्ट्रिब्यूशन एक्सटेंशन: कुछ न करें तो अकाउंट अपने-आप इस मोड में चला जाता है — नया पैसा जमा नहीं कर सकते, लेकिन मौजूदा बैलेंस पर ब्याज मिलता रहता है
- बिना कॉन्ट्रिब्यूशन वाले एक्सटेंशन में साल में एक बार, बिना किसी सीमा के, कितनी भी रकम निकाली जा सकती है
- कॉन्ट्रिब्यूशन वाले एक्सटेंशन में भी साल में एक निकासी की अनुमति है, लेकिन यह एक्सटेंशन शुरू होने के समय के बैलेंस के एक हिस्से तक सीमित रहती है
- PPF को 15 साल के बाद असीमित बार, 5-5 साल के ब्लॉक में एक्सटेंड किया जा सकता है
विकल्प 1: पूरी निकासी करके अकाउंट बंद करें
आप चाहें तो पूरा जमा बैलेंस निकालकर अकाउंट बंद कर सकते हैं। बंद होने वाले महीने से पिछले महीने के आखिरी दिन तक का ब्याज मिलता है। चूंकि PPF EEE कैटेगरी में आता है, पूरी मैच्योरिटी रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। यह विकल्प उन लोगों के लिए ठीक है जिन्हें अभी बड़ी रकम की ज़रूरत है या जो इस पैसे को कहीं और निवेश करना चाहते हैं।
विकल्प 2: कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ एक्सटेंशन (Form H)
अगर आप निवेश जारी रखना चाहते हैं, तो मैच्योरिटी की तारीख़ से 1 साल के भीतर Form H जमा करना ज़रूरी है। इसके बाद आप पहले की तरह ₹1.5 लाख तक सालाना जमा कर सकते हैं और पुरानी टैक्स व्यवस्था में 80C छूट का फ़ायदा भी जारी रहता है। अगर तय समय में Form H जमा नहीं किया गया, तो उस ब्लॉक में आगे कोई नया कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं किया जा सकता।
इस मोड में साल में एक निकासी की अनुमति है, लेकिन यह एक्सटेंशन ब्लॉक शुरू होने के समय मौजूद बैलेंस के एक तय हिस्से तक सीमित रहती है — पूरी रकम एक साथ नहीं निकाली जा सकती।
व्यावहारिक सलाह: जो लोग सबसे ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में हैं, उनके लिए यह विकल्प खासतौर पर फ़ायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे गारंटीड, टैक्स-फ्री रिटर्न के साथ 80C डिडक्शन का फ़ायदा भी जारी रहता है — बशर्ते वे पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनें।

विकल्प 3: बिना कॉन्ट्रिब्यूशन एक्सटेंशन (डिफ़ॉल्ट विकल्प)
अगर मैच्योरिटी के बाद कोई फॉर्म जमा नहीं किया जाता और न ही अकाउंट बंद किया जाता, तो यह अपने-आप इस मोड में चला जाता है। नया पैसा जमा नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा बैलेंस पर मौजूदा दर से ब्याज मिलता रहता है।
इस मोड की सबसे बड़ी खूबी यह है कि साल में एक बार, बिना किसी ऊपरी सीमा के, कितनी भी रकम निकाली जा सकती है — यानी अगर चाहें तो पूरा बैलेंस भी एक बार में निकाला जा सकता है। यह उन लोगों के लिए बेहतर हो सकता है जो फ़िलहाल नया निवेश नहीं करना चाहते, लेकिन पैसे को सुरक्षित और लिक्विड भी रखना चाहते हैं।
अगर कुछ न करें तो क्या होगा?
कुछ लोग सोचते हैं कि मैच्योरिटी पर कोई एक्शन न लेने से अकाउंट अपने-आप बंद हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता। अकाउंट खुला रहता है और अपने-आप “बिना कॉन्ट्रिब्यूशन एक्सटेंशन” मोड में चला जाता है — यही डिफ़ॉल्ट व्यवहार है।
तीनों विकल्पों की तुलना
| पैरामीटर | पूरी निकासी | कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ एक्सटेंशन | बिना कॉन्ट्रिब्यूशन एक्सटेंशन |
|---|---|---|---|
| नया निवेश संभव? | लागू नहीं (अकाउंट बंद) | हां, ₹1.5 लाख/साल तक | नहीं |
| 80C छूट जारी रहेगी? | लागू नहीं | हां (पुरानी टैक्स व्यवस्था में) | नहीं |
| निकासी सीमा | पूरा बैलेंस एक साथ | साल में 1 बार, तय हिस्से तक सीमित | साल में 1 बार, बिना किसी सीमा के |
| ज़रूरी फॉर्म | Form C | Form H (1 साल के भीतर) | कोई फॉर्म ज़रूरी नहीं (डिफ़ॉल्ट) |
| सबसे उपयुक्त किसके लिए | तुरंत पैसे की ज़रूरत वालों के लिए | अभी भी कमाई कर रहे, ऊंचे टैक्स ब्रैकेट वालों के लिए | निवेश रोकना है पर पैसा सुरक्षित रखना है, ऐसे लोगों के लिए |
ज़रूरी सावधानियां
- Form H जमा करने की समयसीमा मैच्योरिटी की तारीख़ से सिर्फ 1 साल है — यह चूक जाने पर उस ब्लॉक में नया कॉन्ट्रिब्यूशन करने का विकल्प खत्म हो जाता है।
- हर नए 5-साल ब्लॉक की शुरुआत में यह तय किया जा सकता है कि इस बार कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ जाना है या बिना कॉन्ट्रिब्यूशन — यानी विकल्प हर ब्लॉक में बदला जा सकता है।
- फॉर्म का नाम/नंबर समय के साथ बदल भी सकता है (कुछ हालिया स्रोत इसे “Form 4” भी कह रहे हैं) — जमा करने से पहले अपने बैंक/पोस्ट ऑफिस से मौजूदा फॉर्म नंबर की पुष्टि ज़रूर कर लें।
FAQ
1. PPF मैच्योर होने पर मेरे पास क्या विकल्प हैं?
तीन विकल्प हैं — पूरी रकम निकालकर अकाउंट बंद करना, Form H जमा कर कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ 5 साल के लिए एक्सटेंड करना, या बिना कोई नया पैसा जमा किए इसे यूं ही जारी रखना।
2. अगर मैं मैच्योरिटी पर कुछ न करूं तो क्या होगा?
अकाउंट अपने-आप “बिना कॉन्ट्रिब्यूशन एक्सटेंशन” मोड में चला जाता है — नया निवेश नहीं कर सकते, लेकिन मौजूदा बैलेंस पर ब्याज मिलता रहता है।
3. एक्सटेंशन के साथ कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखने के लिए क्या करना होगा?
मैच्योरिटी की तारीख़ से 1 साल के भीतर Form H जमा करना होगा, इसके बाद पहले जैसे ₹1.5 लाख तक सालाना निवेश और 80C छूट जारी रह सकती है।
4. बिना कॉन्ट्रिब्यूशन एक्सटेंशन में कितना पैसा निकाला जा सकता है?
साल में एक बार, बिना किसी सीमा के — पूरा बैलेंस भी एक साथ निकाला जा सकता है।
5. कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ एक्सटेंशन में निकासी की क्या सीमा है?
साल में एक निकासी की अनुमति है, लेकिन यह एक्सटेंशन ब्लॉक शुरू होने के समय के बैलेंस के एक तय हिस्से तक सीमित रहती है।
6. क्या मैं हर 5 साल के ब्लॉक में विकल्प बदल सकता हूं?
हां, हर नए ब्लॉक की शुरुआत में तय किया जा सकता है कि कॉन्ट्रिब्यूशन के साथ जाना है या बिना कॉन्ट्रिब्यूशन — यह हर बार बदला जा सकता है।
- “PPF कैलकुलेटर: 15 साल में कितना पैसा मिलेगा?“
- “PPF अकाउंट कैसे खोलें: बैंक या पोस्ट ऑफिस, कहां फायदा ज्यादा?”
- “PPF vs EPF vs NPS: रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?”
External/Authoritative Sources to Verify & Link:
- इंडिया पोस्ट/नेशनल सेविंग्स इंस्टीट्यूट की आधिकारिक वेबसाइट — PPF एक्सटेंशन नियमों और Form H पर
- वित्त मंत्रालय की PPF स्कीम अधिसूचना — मौजूदा फॉर्म नंबर और नियमों पर
- संबंधित बैंक/पोस्ट ऑफिस की आधिकारिक वेबसाइट — फॉर्म डाउनलोड और प्रोसेस पर







