कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए PF पर ब्याज दर 8.25% पर बरकरार रखी है, यानी सैलरी से कटने वाले PF पर मिलने वाला रिटर्न पिछले साल जैसा ही रहेगा। यह दर लगातार तीसरे वित्त वर्ष के लिए बरकरार रखी गई है, जिससे 7 करोड़ से ज़्यादा EPF सदस्यों को रिटर्न में निरंतरता मिलेगी। इसी के साथ सरकार ने पुरानी EPF स्कीम, 1952 की जगह नई EPF स्कीम 2026 लागू कर दी है, जिसमें PF निकासी के नियम पहले से आसान बनाए गए हैं।
एक नज़र में
- वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF ब्याज दर 8.25% तय, लगातार तीसरे साल यह दर स्थिर
- EPFO की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की 239वीं बैठक में यह फैसला हुआ, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री मनसुख मांडविया ने की
- सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत EPF स्कीम, 1952 की जगह अब EPF स्कीम, 2026 लागू हो चुकी है
- PF आंशिक निकासी की 13 पुरानी कैटेगरी को अब तीन मुख्य वर्गों में समेट दिया गया है
- ऑटो-सेटलमेंट लिमिट ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है
- EPFO 3.0 के तहत UPI और ATM कार्ड से PF निकासी की सुविधा चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है
EPF पर 8.25% ब्याज दर बरकरार क्यों रखी गई?
EPFO ने नई दिल्ली में हुई CBT की 239वीं बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर को मंज़ूरी दी। बैठक में श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, श्रम एवं रोज़गार सचिव वंदना गुरनानी और EPFO प्रमुख रमेश कृष्णमूर्ति भी मौजूद रहे। CBT की सिफारिश अब औपचारिक पुष्टि के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजी जाएगी, और मंज़ूरी के बाद ही यह ब्याज सदस्यों के खातों में क्रेडिट होगा।
EPFO के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद संगठन ने अपने ब्याज खाते पर दबाव डाले बिना स्थिर रिटर्न बनाए रखा है।
समझें: ब्याज हर महीने की क्लोजिंग बैलेंस पर कैलकुलेट होता है, लेकिन खाते में क्रेडिट वित्त वर्ष के अंत यानी 31 मार्च को होता है।
EPF स्कीम 2026 क्या है और यह पुरानी स्कीम से कैसे अलग है?
सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत ‘Employees’ Provident Funds (EPF) Scheme, 2026′, ‘Employees’ Pension Scheme (EPS), 2026′ और ‘Employees’ Deposit-Linked Insurance (EDLI) Scheme, 2026′ को अधिसूचित कर दिया है, जिसने 1952, 1971, 1976 और 1995 की पुरानी स्कीमों की जगह ली है।
नई स्कीम में PF की मूल व्यवस्था पहले जैसी ही रखी गई है, लेकिन कई प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं, साथ ही अनिवार्य EPF योगदान के कैलकुलेशन का तरीका भी स्पष्ट किया गया है। मकसद है EPFO की सेवाओं को ज़्यादा डिजिटल और कर्मचारियों के लिए सरल बनाना।
(इमेज सुझाव: EPF स्कीम 1952 बनाम EPF स्कीम 2026 की तुलना दिखाता इन्फोग्राफिक। Alt text: “EPF स्कीम 1952 और EPF स्कीम 2026 में अंतर दिखाता इन्फोग्राफिक”)
PF निकासी के नए 3 कैटेगरी कौन से हैं?
पहले PF आंशिक निकासी के लिए अलग-अलग परिस्थितियों की कई कैटेगरी थीं, जिन्हें अब तीन मुख्य वर्गों में समाहित किया गया है — शिक्षा, विवाह और गंभीर बीमारी जैसी ज़रूरी ज़रूरतें; घर खरीदने, निर्माण या आवास से जुड़ी ज़रूरतें; और विशेष परिस्थितियां।
नई व्यवस्था के तहत विवाह के लिए पूरे खाते की अवधि में अधिकतम 5 बार, जबकि शिक्षा के लिए सर्विस पीरियड में अधिकतम 10 बार निकासी की अनुमति होगी। ज़्यादातर निकासी के लिए न्यूनतम 7 साल की EPF सदस्यता ज़रूरी होगी।
ऑटो-सेटलमेंट लिमिट ₹5 लाख: क्या बदला?
EPFO 3.0 के तहत ऑटो-सेटलमेंट की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है, और ज़्यादातर क्लेम के लिए एम्प्लॉयर की मंज़ूरी की ज़रूरत भी हटा दी गई है। इसका मतलब है कि तय सीमा के भीतर योग्य क्लेम बिना मैनुअल दखल के अपने-आप सेटल हो जाएंगे, जिससे पैसा जल्दी मिलेगा।
EPFO 3.0: UPI और ATM से PF निकासी कैसे होगी?
EPFO 3.0 के तहत सदस्य UPI ऐप्स और एक खास EPFO ATM कार्ड के ज़रिए योग्य PF रकम निकाल सकेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक UPI से निकासी की सीमा कुल जमा PF बैलेंस के 75% तक और ATM कार्ड से सीधी नकद निकासी की सीमा 50% तक रखी जा सकती है। साथ ही, सक्रिय सेवा के दौरान खाते में कुल PF बैलेंस का कम से कम 25% हिस्सा हर समय बचा रहना अनिवार्य होगा।
ज़रूरी: UPI/ATM निकासी सुविधा के पूर्ण रोलआउट की तारीख़ को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में भिन्नता है — कुछ रिपोर्ट्स इसे जून 2026 से प्रभावी बता रही हैं, तो कुछ अभी टेस्टिंग चरण में होने की बात कह रही हैं। प्रकाशन से पहले EPFO की आधिकारिक वेबसाइट या PIB से मौजूदा स्थिति ज़रूर जांच लें।
इसके अलावा, नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से PF निकासी पर TDS डिक्लेरेशन के लिए फॉर्म 15G और 15H की जगह एक ही फॉर्म 121 इस्तेमाल हो रहा है।
क्या आपकी सैलरी से कटने वाला PF अंशदान बदलेगा?
सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव उन कर्मचारियों की PF कटौती अपने-आप कम नहीं करेगा जो पहले से अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर EPF जमा कर रहे हैं। यानी मौजूदा अंशदान ढांचे में तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं है।
EPS पेंशन से जुड़ा एक बदलाव
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पेंशन में निरंतरता बढ़ाने के लिए EPS वेटिंग पीरियड 2 महीने से बढ़ाकर 36 महीने किया गया है। चूंकि यह जानकारी अभी सीमित स्रोतों में ही है, प्रकाशन से पहले इसे EPFO के आधिकारिक नोटिफिकेशन से क्रॉस-चेक कर लें।
इस बारे में और जानकारी आने पर इस लेख को अपडेट किया जाएगा।
FAQ
1. वित्त वर्ष 2025-26 में EPF पर कितना ब्याज मिलेगा?
EPFO की सिफारिश के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25% वार्षिक ब्याज मिलेगा, जो वित्त मंत्रालय की मंज़ूरी के बाद खातों में क्रेडिट होगा।
2. नई EPF स्कीम 2026 कब से और किसके तहत लागू हुई?
नई EPF स्कीम 2026 सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है, और इसने दशकों पुरानी EPF स्कीम, 1952 की जगह ली है।
3. PF ऑटो-सेटलमेंट लिमिट अब कितनी है?
EPFO 3.0 के तहत ऑटो-सेटलमेंट की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है, जिससे योग्य क्लेम तेज़ी से सेटल होंगे।
4. क्या अब EPF से UPI के ज़रिए पैसा निकाल सकते हैं?
EPFO 3.0 के तहत UPI और ATM कार्ड से PF निकासी की योजना है, लेकिन इसका पूर्ण रोलआउट चरणबद्ध तरीके से हो रहा है, इसलिए अपने क्षेत्र में मौजूदा उपलब्धता EPFO पोर्टल से जांचें।
5. क्या नई स्कीम से मौजूदा PF कटौती कम होगी?
नहीं, सरकार के मुताबिक जो कर्मचारी पहले से पूरी बेसिक सैलरी पर PF जमा कर रहे हैं, उनकी कटौती में नई स्कीम से कोई अपने-आप बदलाव नहीं होगा।
6. PF निकासी की नई तीन कैटेगरी कौन-सी हैं?
शिक्षा-विवाह-गंभीर बीमारी जैसी ज़रूरी ज़रूरतें, घर खरीदने/निर्माण से जुड़ी ज़रूरतें, और विशेष परिस्थितियां — इन तीन वर्गों में पुरानी 13 कैटेगरी को समेटा गया है।
Suggested External/Authoritative Sources to Verify & Link:
- EPFO की आधिकारिक वेबसाइट (epfindia.gov.in) — ब्याज दर व स्कीम नोटिफिकेशन की मूल कॉपी
- PIB (Press Information Bureau) का आधिकारिक प्रेस रिलीज़ — CBT की 239वीं बैठक पर
- श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का आधिकारिक बयान/नोटिफिकेशन — EPF स्कीम 2026 पर
Suggested Internal Links:
- “EPF पासबुक ऑनलाइन कैसे चेक करें”
- “UAN एक्टिवेट और KYC अपडेट कैसे करें”
- “इनकम टैक्स के नए नियम 2026 में क्या बदला”





