1 अप्रैल 2026 से जाना-पहचाना Section 80C अब नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत Section 123 कहलाता है, लेकिन इसका मूल फ़ायदा वही है — ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट, जिसमें PPF और EPF दोनों निवेश शामिल होते हैं। सबसे ज़रूरी बात जो अक्सर लोग नहीं समझते: यह ₹1.5 लाख की सीमा PPF और EPF के लिए अलग-अलग नहीं, बल्कि दोनों को मिलाकर एक ही है।
एक नज़र में
- Section 80C अब Section 123 कहलाता है, और यह इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 (टैक्स ईयर 2026-27) से लागू है
- डिडक्शन की रकम पहले जैसी ही है — सालाना ₹1.5 लाख तक, जो PPF, EPF (आपका अपना योगदान), ELSS, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे कई निवेशों को मिलाकर एक साथ गिनी जाती है
- यह छूट सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है; नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले टैक्सपेयर इस डिडक्शन के योग्य नहीं हैं
- NPS में अतिरिक्त ₹50,000 की छूट अब अलग Section 124 (पुराना 80CCD(1B)) के तहत मिलती है, जो इस ₹1.5 लाख की सीमा से बाहर है
- ₹1.5 लाख की यह सीमा 2014 के बजट से अब तक नहीं बदली है, हालांकि उद्योग संगठनों ने इसे बढ़ाकर ₹3.5 लाख करने की मांग की है
- ज़्यादातर वेतनभोगी कर्मचारियों का EPF योगदान अपने-आप इस सीमा का एक हिस्सा भर देता है — बाकी बचा हिस्सा ही PPF जैसे विकल्पों से भरना ज़रूरी है
Section 80C अब Section 123: क्या बदला और क्या नहीं?
1 अप्रैल 2026 से भारत ने छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 अपनाया है। इस नए कानून में टैक्स दरों या डिडक्शन की रकम में कोई बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन पूरे कानून को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है, जिससे कई जानी-पहचानी धाराओं के नंबर बदल गए हैं।
पहले Section 80C में शामिल सभी योग्य निवेश बिखरे हुए थे, अब उन्हें एक व्यवस्थित ‘Schedule XV’ में साफ़ तौर पर सूचीबद्ध कर दिया गया है, जिससे टैक्सपेयर्स के लिए समझना आसान हो गया है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सिर्फ एक संरचनात्मक बदलाव है, फ़ायदे में कोई कमी नहीं आई है — बस रिटर्न फाइल करते समय नए सेक्शन नंबर का ध्यान रखना ज़रूरी है।
PPF और EPF, दोनों Section 123 के तहत कैसे आते हैं?
Schedule XV में जिन निवेशों को Section 123 के तहत छूट मिलती है, उनमें SSY, NPS, EPF, ELSS, NSC और LIC शामिल हैं। इसका मतलब है:
- PPF: आपका पूरा सालाना PPF निवेश (₹1.5 लाख तक) इस डिडक्शन में गिना जाता है
- EPF: सिर्फ आपका अपना योगदान (आमतौर पर बेसिक सैलरी + DA का 12%) इसमें गिना जाता है, एम्प्लॉयर का योगदान इसमें शामिल नहीं होता

सबसे बड़ी गलती: दोनों को अलग-अलग ₹1.5 लाख मानना
यह डिडक्शन सीमा कुल मिलाकर निवेश की गई रकम पर लागू होती है, न कि हर एक निवेश/भुगतान के हिसाब से अलग-अलग। चाहे आप कितने भी अलग-अलग योग्य निवेश करें, अधिकतम सीमा ₹1.5 लाख ही तय है।
यही वह जगह है जहां ज़्यादातर लोग गलती करते हैं — वे मान लेते हैं कि EPF और PPF दोनों में अलग-अलग ₹1.5 लाख का फ़ायदा मिलेगा, जबकि असल में दोनों को जोड़कर सिर्फ एक बार ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है।
पूरे ₹1.5 लाख का फायदा कैसे उठाएं?
मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी + DA ₹40,000 प्रति महीना है। आपका EPF योगदान (12%) होगा:
₹40,000 × 12% = ₹4,800 प्रति महीना = ₹57,600 प्रति वर्ष
चूंकि Section 123 की पूरी सीमा ₹1,50,000 है, आपके पास अभी भी
₹1,50,000 – ₹57,600 = ₹92,400
की गुंजाइश बची है, जिसे आप PPF, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, या SSY जैसे किसी भी योग्य विकल्प में निवेश कर भर सकते हैं। इस तरह अपनी सैलरी स्लिप से EPF योगदान चेक करके ही तय करें कि PPF में कितना डालना बाकी है — बिना हिसाब लगाए पूरे ₹1.5 लाख PPF में डालने से आपकी टैक्स-फ्री बचत तो बढ़ेगी, लेकिन अतिरिक्त डिडक्शन का फ़ायदा नहीं मिलेगा क्योंकि सीमा पहले ही पार हो चुकी होगी।
पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था: Section 123 कहां काम करता है?
Section 80C/123 की छूट सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। जो टैक्सपेयर नई टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, वे इस डिडक्शन के योग्य नहीं होते। चूंकि नई टैक्स व्यवस्था अब डिफ़ॉल्ट है, इसलिए कई टैक्सपेयर यह डिडक्शन क्लेम ही नहीं कर पाते — कुछ मामलों में नई व्यवस्था में टैक्स कम बैठता है, भले ही पुरानी व्यवस्था में पूरे ₹1.5 लाख का 80C इस्तेमाल किया जाए।
समझें: अगर आप नई टैक्स व्यवस्था में हैं, तो भी PPF/EPF में निवेश करना बुरा फ़ैसला नहीं है — ब्याज और मैच्योरिटी अब भी टैक्स-फ्री रहती है, बस निवेश करते समय ऊपरी डिडक्शन (Section 123) का फ़ायदा नहीं मिलेगा। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं में अपनी कुल टैक्स देनदारी की तुलना करके ही फ़ैसला लेना बेहतर रहेगा।
Section 123 के तहत और क्या-क्या आता है?
PPF और EPF के अलावा सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), NPS का अपना योगदान, ELSS म्यूचुअल फंड, NSC और LIC प्रीमियम भी इसी सीमा में गिने जाते हैं। इनके अलावा होम लोन के प्रिंसिपल की किश्त और बच्चों की ट्यूशन फ़ीस (अधिकतम 2 बच्चों तक) भी इसी छूट में शामिल होती है।
अगर आपने EPF, PPF और लाइफ इंश्योरेंस से पूरे ₹1.5 लाख की सीमा पहले ही भर ली है, तो NPS में निवेश कर अतिरिक्त ₹50,000 की छूट अलग से (Section 124 के तहत) ली जा सकती है।
FAQ
1. क्या PPF और EPF पर अलग-अलग ₹1.5 लाख की टैक्स छूट मिलती है?
नहीं, दोनों को मिलाकर सिर्फ एक ही ₹1.5 लाख की सीमा है। यह Section 123 (पुराना Section 80C) के तहत कुल निवेश पर लागू होती है, हर स्कीम पर अलग से नहीं।
2. Section 80C अब किस नाम से जाना जाता है?
1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत यह Section 123 कहलाता है, और योग्य निवेशों की सूची Schedule XV में दी गई है।
3. क्या नई टैक्स व्यवस्था में PPF/EPF पर टैक्स छूट मिलती है?
Section 123 की डिडक्शन सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। नई टैक्स व्यवस्था में यह डिडक्शन उपलब्ध नहीं है, हालांकि PPF का ब्याज और मैच्योरिटी दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स-फ्री रहती है।
4. मुझे कैसे पता चलेगा कि PPF में कितना निवेश करना है?
अपनी सैलरी स्लिप से सालाना EPF योगदान चेक करें, फिर ₹1.5 लाख में से उसे घटाकर बची हुई रकम PPF या अन्य योग्य विकल्पों में निवेश करें।
5. क्या EPF में एम्प्लॉयर का योगदान भी इस छूट में गिना जाता है?
नहीं, सिर्फ आपका अपना (कर्मचारी का) EPF योगदान ही Section 123 की छूट में गिना जाता है, एम्प्लॉयर का हिस्सा नहीं।
6. ₹1.5 लाख से ज़्यादा PPF/EPF में निवेश करने पर क्या होगा?
अतिरिक्त रकम पर कोई नई टैक्स छूट नहीं मिलेगी, लेकिन वह निवेश PPF की EEE स्थिति की वजह से फिर भी टैक्स-फ्री ब्याज कमाता रहेगा।
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