1 अप्रैल 2026 से PF निकासी पर TDS छूट पाने के लिए पुराने Form 15G और Form 15H की जगह अब एक नया, एकीकृत Form 121 लागू हो गया है। यानी उम्र चाहे जो भी हो, अब सभी योग्य EPF सदस्यों को TDS से बचने के लिए एक ही फॉर्म भरना होगा — पुराना उम्र के आधार पर अलग-अलग फॉर्म चुनने का झंझट खत्म।
एक नज़र में
- Form 15G (60 साल से कम) और Form 15H (60+ साल) की जगह अब सिर्फ एक Form 121 है, उम्र की कोई अलग शर्त नहीं
- यह इनकम टैक्स एक्ट, 2025 और इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के रूल 211 के तहत लागू किया गया है
- EPFO ने 1 अप्रैल से Form 15G और 15H की जगह यूनिफाइड Form 121 अपनाया है, जो इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के मुताबिक है
- पुराने Form 15G/15H आगे कैरी फॉरवर्ड नहीं होते — हर टैक्स ईयर के लिए नया Form 121 भरना ज़रूरी है
- सिर्फ रेजिडेंट इंडिविजुअल और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) ही यह फॉर्म भर सकते हैं; कंपनी, फर्म और NRI इसके योग्य नहीं हैं
- PF पर TDS से जुड़ा पुराना सेक्शन 192A भी अब नए एक्ट में सेक्शन 392(7) के तौर पर जाना जाता है
Form 121 क्या है और यह क्यों लाया गया?
Form 121 एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है, जिसे कोई योग्य टैक्सपेयर पेयर (जैसे बैंक, EPFO) के पास जमा करता है ताकि यह घोषित किया जा सके कि उसकी कुल अनुमानित आय टैक्सेबल लिमिट से कम है, इसलिए उसकी फाइनल टैक्स लायबिलिटी शून्य रहेगी और TDS नहीं काटा जाना चाहिए।
पिछले पांच सालों में हर साल औसतन करीब 90 लाख Form 15G और 1 करोड़ Form 15H डिक्लेरेशन अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में जमा होते थे, जिससे प्रशासनिक जटिलता काफी बढ़ जाती थी — इसी को कम करने के लिए दोनों फॉर्म को मिलाकर Form 121 बनाया गया।
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Form 15G और Form 15H से यह कैसे अलग है?
पहले Form 15G उन 60 साल से कम उम्र के रेजिडेंट इंडिविजुअल और HUF के लिए था जिनकी उस साल कोई टैक्स देनदारी नहीं थी और जिनकी ब्याज आय टैक्स छूट की सीमा से कम थी। वहीं Form 15H 60 साल या उससे ज़्यादा उम्र के उन लोगों के लिए था जिनकी कुल अनुमानित आय, डिडक्शन के बाद, टैक्सेबल लिमिट से कम थी।
नए ढांचे में Form 121 सभी योग्य व्यक्तियों के लिए एक जैसा है, चाहे उम्र कुछ भी हो। हालांकि फॉर्म में एक कॉलम ज़रूर है जहां बताना होता है कि आपकी उम्र 60 साल या उससे ज़्यादा है या नहीं।

PF निकासी पर TDS कब लगता है?
EPF निकासी पर TDS से जुड़ा प्रावधान, जो पहले इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 192A में था, अब नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत सेक्शन 392(7) में आ गया है, और यह 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है — लेकिन इसमें मूल प्रावधान वही रखे गए हैं।
मौजूदा नियम के मुताबिक अगर कोई सदस्य 5 साल की लगातार सेवा पूरी करने से पहले PF निकालता है और टैक्सेबल रकम ₹50,000 या उससे ज़्यादा है, तो EPFO 10% की दर से TDS काटता है। 5 साल की सेवा पूरी होने पर कोई TDS नहीं लगता और निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री रहती है। अगर PAN जमा नहीं किया गया हो, तो TDS की दर बढ़कर काफी ज़्यादा (मार्जिनल रेट पर) हो जाती है, इसलिए निकासी से पहले PAN देना ज़रूरी है।
समझें: यहीं पर Form 121 काम आता है — भले ही आपकी सेवा 5 साल से कम हो और निकासी ₹50,000 से ज़्यादा हो, अगर आपकी कुल सालाना आय टैक्स योग्य नहीं है, तो Form 121 जमा कर TDS कटने से बचा जा सकता है।
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Form 121 कौन भर सकता है?
कोई भी टैक्सपेयर Form 121 तभी भर सकता है जब उसकी उस वित्त वर्ष के लिए अनुमानित कुल आय टैक्स योग्य न हो — और यह गणना सिर्फ TDS वाली आय पर नहीं, बल्कि सभी स्रोतों से हुई कुल आय पर होती है।
पुराने टैक्स रिजीम में यह छूट सीमा 60 साल से कम उम्र वालों के लिए ₹2.5 लाख, 60-79 साल के लिए ₹3 लाख और 80 साल से ऊपर के लिए ₹5 लाख है। वहीं नए टैक्स रिजीम में, जो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए डिफ़ॉल्ट है, उम्र चाहे जो हो, यह सीमा एक समान ₹4 लाख रखी गई है।
हालांकि सेक्शन 87A रिबेट की वजह से, नए टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक की कुल आय वाले कुछ लोगों की फाइनल टैक्स लायबिलिटी भी शून्य हो सकती है, और वे भी योग्यता की शर्तें पूरी करने पर Form 121 भर सकते हैं — असल शर्त यही है कि आपकी अंतिम टैक्स देनदारी शून्य होनी चाहिए।
EPFO पर Form 121 कैसे और कब भरें?
EPFO ने 1 अप्रैल 2026 से PF निकासी पर TDS छूट के दावों के लिए Form 121 को अनिवार्य कर दिया है, जो इनकम टैक्स एक्ट 2025 के मुताबिक तय किया गया एक अनुपालन बदलाव है।
ज़रूरी टाइमिंग: यह डिक्लेरेशन आय क्रेडिट या भुगतान होने से पहले पेयर (यहां EPFO) को इलेक्ट्रॉनिक या पेपर फॉर्म में जमा करना होता है, और हर टैक्स ईयर के लिए इसे दोबारा भरना ज़रूरी है। अगर Form 121 PF निकासी की प्रोसेसिंग शुरू होने के बाद जमा किया जाता है, तो हो सकता है TDS पहले ही कट चुका हो — ऐसे में यह रकम वापस पाने के लिए ITR फाइल कर रिफंड क्लेम करना पड़ता है।
ध्यान रखने वाली ज़रूरी बातें
- Form 121 जमा करने से सिर्फ TDS कटने से बचाव होता है, इससे आपकी आय अपने-आप टैक्स-फ्री नहीं हो जाती और न ही इससे इनकम टैक्स रिटर्न भरने की ज़रूरत खत्म होती है।
- Form 121 एक सेल्फ-डिक्लेरेशन है जिसमें आप प्रमाणित करते हैं कि आपकी टैक्स देनदारी शून्य है — गलत घोषणा करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इसलिए फॉर्म भरने से पहले अपनी आय की सही गणना कर लें।
- कंपनियां, फर्म और नॉन-रेजिडेंट (NRI) इस फॉर्म के लिए योग्य नहीं हैं।
FAQ
1. Form 121 क्या है और यह किसकी जगह लाया गया है?
Form 121 एक नया एकीकृत सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है, जो 1 अप्रैल 2026 से पुराने Form 15G और Form 15H दोनों की जगह ले चुका है।
2. क्या मुझे PF निकासी के लिए Form 121 भरना ज़रूरी है?
सिर्फ तभी, जब आप 5 साल की सेवा पूरी होने से पहले ₹50,000 या उससे ज़्यादा की निकासी कर रहे हों और आपकी कुल सालाना आय टैक्स योग्य सीमा से कम हो और आप TDS कटने से बचना चाहते हों।
3. क्या पुराना Form 15G/15H अब भी मान्य है?
नहीं, 1 अप्रैल 2026 से पुराने Form 15G और Form 15H की जगह Form 121 ने ले ली है, और पुराने फॉर्म आगे कैरी फॉरवर्ड नहीं होते।
4. Form 121 कौन भर सकता है?
सिर्फ रेजिडेंट इंडिविजुअल और HUF, जिनकी उस वित्त वर्ष की कुल अनुमानित टैक्स देनदारी शून्य हो; कंपनी, फर्म और NRI इसके योग्य नहीं हैं।
5. Form 121 कब जमा करना चाहिए?
आय क्रेडिट होने या भुगतान होने से पहले, आदर्श रूप से वित्त वर्ष की शुरुआत में या PF क्लेम जमा करते समय — देर से जमा करने पर TDS पहले ही कट सकता है।
6. अगर Form 121 जमा करने के बावजूद TDS कट जाए तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में कटा हुआ TDS वापस पाने के लिए संबंधित वित्त वर्ष का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर रिफंड क्लेम किया जा सकता है।
Suggested External/Authoritative Sources to Verify & Link:
- इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट (incometax.gov.in) — Form 121 यूज़र मैनुअल और आधिकारिक फॉर्म
- EPFO का 13 अप्रैल 2026 का वेब सर्कुलर — Form 121 अनिवार्यता पर
- इनकम टैक्स एक्ट, 2025 और इनकम टैक्स रूल्स, 2026 का आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन







