बॉम्बे हाई कोर्ट ने वीरेंद्र सिंह तावड़े को दी गई जमानत का विरोध करने वाली 2018 की अपील की सुनवाई के प्रति अपने ढुलमुल रवैये पर मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की। वह कार्यकर्ता, भाकपा नेता गोविंद पानसरे की मौत के मामले में आरोपी हैं।
खबरों के मुताबिक, 11 अक्टूबर को न्यायमूर्ति सारंग बी कोतवाल की एकल पीठ ने सरकार की ओर से पेश एक वकील द्वारा याचिका में स्थगन की मांग के बाद नाराजगी व्यक्त की।
एक इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट में जस्टिस कोतवाल के हवाले से कहा गया है कि अभियोजन पक्ष की ओर से तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। पीठ ने ‘आखिरी मौका’ देते हुए मामले को 22 नवंबर को सुनवाई के लिए स्थगित करने की अनुमति दी।
गोविंद पानसरे हत्याकांड, तावड़े की गिरफ्तारी
पानसरे को 16 फरवरी, 2015 को कोल्हापुर में उनके आवास के पास गोली मार दी गई थी और चार दिन बाद, उन्होंने दम तोड़ दिया।
तावड़े को पानसरे की हत्या के लिए महाराष्ट्र के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस आधार पर गिरफ्तार किया था कि वह मुख्य आरोपी है।
तावड़े को मिली जमानत
तावड़े, जो 2013 में तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में भी आरोपी हैं, को 2018 में कोल्हापुर सत्र अदालत ने यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि मुकदमा शुरू होना बाकी है।
इससे क्षुब्ध राज्य सरकार ने जमानत रद्द करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
इससे पहले अगस्त में उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले की जांच एसआईटी से आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) को स्थानांतरित कर दी थी।
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<!– Published on: Wednesday, October 12, 2022, 03:47 PM IST –>
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