श्री प्रशुराम आरती
जमदग्निकुलभूषण मुक्तफलदासन। बहुत सज्जन मनमोहन रजनीकरवदना। देवता आपकी असंख्य महिमाओं को नहीं जानते। वक्ता के गले की आवाज झील की ...
जमदग्निकुलभूषण मुक्तफलदासन। बहुत सज्जन मनमोहन रजनीकरवदना। देवता आपकी असंख्य महिमाओं को नहीं जानते। वक्ता के गले की आवाज झील की ...
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