सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के कुछ प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखा और कहा कि हर मामले में संबंधित व्यक्ति को प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) देना अनिवार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी के समय अगर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आधार का खुलासा करता है तो यह पर्याप्त है।
शीर्ष अदालत ने पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की व्याख्या से संबंधित याचिकाओं के एक बैच पर अपना फैसला सुनाया।
पर प्रकाशित
27 जुलाई 2022








